आसमां की हथेली में धुंधली सी सफेदी है ,
उम्मीदों से सींची हुई हमारी जमीं है
फागुन के बयार में खामोश सी सरगोशी है ,
हवाओं के रुख में खुशमिजाजी नमी है
कुछ थोड़ी सी कमी है
मन में ग़लतफ़हमी है
कुछ गीले अवसादों में
बुधवार, 7 मार्च 2012
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