शनिवार, 1 अगस्त 2009

आरक्षण विरोध

हे युवाओं ! उठो और बहिष्कार कर दो ,
आरक्षण के उत्थान को तुम खाक़ कर दो ,

आरक्षण तो स्वार्थ है नेताओं का ,
जो कर देते हैं खंडन हम युवाओं का,
बना लेते हैं सरकार हमारे वोट से ,
और घोट देते हैं गला विश्वासों का,

नेताओं की इस तृष्णा को ख़त्म कर दो,
वोट राजनीति को संसद में बंद कर दो ,
हमारा और दोहन हो ना पाएगा -
तुम ये नारा और भी बुलंद कर दो ,

वक्त है यंही हमारी एकजुटता का,
अपने विरोध स्वर के सदिश प्रसारता का,
राज रक्षक वहीं जो बन बैठे हैं भक्षक ,
समय हैं यंही उनके सर्वानाषता का ,

वोट नीति की गली आज अन्धकार कर दो ,
जोश और अटलता का आज तुम हुंकार भर दो ,
हे युवाओं ! उठो और बहिष्कार कर दो,
आरक्षण के उत्थान को तुम खाक़ कर दो ,

1 टिप्पणी:

  1. यही तो दुर्भाग्य है इस देश का कि चन्द मतलोलुप नेताओं और संकीर्ण राजनीति के चलते आरक्षण को सामाजिक न्याय का एकमात्र और अनिवार्य घटक मान लिया गया है। इस भ्रान्ति और दुष्प्रचार से सर्वाधिक हानि भी पिछडे वर्ग (कृपा करके इसे पिछडी जाति मत समझ लीजिएगा) और भारतीय लोकतंत्र के स्वास्थ्य को ही हो रहा है। वंचित वर्गों के लिए विशेष कदम उठाये जाने चाहिए लेकिन वंचितों का निर्धारण उद्देश्यपरक दृष्टिकोण से होना चाहिए नाकि वोटबैंक का साइज़ देखकर। कोई भी जागरुक व्यक्ति सरलता से देख सकता है कि एक ही जाति के अलग-अलग लोगों के शैक्षिक और आर्थिक स्तर में बहुत अंतर है

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